Plazma Therapy

प्लाज्मा थेरैपी द्वारा कोविड-19 उपचार की संभावनाऐं

एक तरफ कोरोना वाइरस दुनियाभर में विकराल रुप लेते जा रहा है । इस कोरोना वायरस को रोकने के लिए दुनिया के कई देशों में इसके इलाज की खोज की जा रही है जिसमें सबसे प्रमुख है प्लाज्मा  थैरेपी | इस थैरेपी को 130 साल पहले 1890 में जर्मनी के फिजियोलाॅजिस्ट एमिल वॉन बॆह्मिग ने खोजा था | इसे नोबल सम्मान भी मिला |

विभिन्न देशों में इस थेरेपी के द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा है और इस थॆरेपी को कारगार माना जा रहा है । भारत के अलावा इस थेरेपी का इस्तेमाल कई अन्य देशो में जिनमें अमेरीका , चीन , स्पेन, इटली आदि मे भी किया जा रहा है । इस कोरोना वायरस से पूर्व भी इस थॆरेपी का प्रयोग कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिये भी किया जा चुका है|इस थेरेपी का इस्तेमाल 2002 मे SARS  ( सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम ) नामक वायरस  मे किया गया | SARS  नामक वायरस ने कई देशो में तबाही मचा रखी थी| इसके बाद 2019 H1N1 इनफेक्शन को रोकने के लिये भी इस थेरेपी का इस्तेमाल किया गया । जिसमें काफी हद तक कामयाबी भी मिली | इसी तरह 2014 मे इबोला वायरस को रोकने के लिये   इस थेरेपी का इस्तेमाल किया गया| 2015 में र्मस (मिडिल इस्ट रेस्पिरेट सिन्ड्रोम ) के इलाज मे भी प्लाज्मा थेरेपी  का इस्तेमाल किया गया । जिससे मरीज के ठीक होने की संभावना बढ जाती है|

प्लाज्मा होता क्या है?

मानव का रक्त, प्लाज्मा तथा रेड ब्लड सेलस, वाईट ब्लड सेलस तथा प्लेटलेट्स आदि से मिलकर बना होतऻ है । प्लाज्मा रक्त मे मौजूद पीले रंग का तरल होता है जब हम रक्त में से  रेड ब्लड सॆल, वाइट ब्लड सेल तथा प्लेटलेट्स आदि को पृथक करने बाद जो  तरल शेष रहा जाता है उसे प्लाज्मा कहते है| यह वाइरसो या जीवाणुओं के खिलाफ एन्टीबाॅडी का निमाण करता है । एन्टीबाॅडी ऐसे प्रोटीन होते है जो वाइरस को खत्म कर सकते है|

प्लाज्मा थेरेपी क्या होती ?

इस थेरेपी में कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए मरीजो के रूधिर से प्लाज्मा को निकाल लिया जाता है और  इसे  कोरोना स॑क्रमित रोगी  में चढऻया जाता है जिसके परिणामस्वरूप संक्रमण से  ठीक  हुए मनुष्य के शरीर में इस वाइरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है |जिससे मरीज के ठीक होने की संभावना बढ जाती है|

प्लाज्मा थैरेपी की क्या जरूरत है ?

कोरोना वायरस के मनुष्य  के शरीर में प्रवेश के बाद मरीज के शरीर में प्लाज्मा के जरिए एंटीबाडी बनने की ताकत सीमित या खत्म हो जाती है । इस कारण इस थेरेपी  का इस्तेमाल कारगर हो सकता है|

यह प्लाज्मा थेरेपी कोई नई थॆरेपी नहीं है यह एक प्रॊमिनेट थॆरेपी है इस थॆरेपी का पहले भी कई वायरसो  के संक्रमणो में प्रयोग किया जा चुका है|

प्रो . प्रवीण गोस्वामी
(प्राणीशास्त्र विभाग )
पोद्दऻर इन्टरनेशनल काॅलेज ,जयपुर